Search engine for discovering works of Art, research articles, and books related to Art and Culture
ShareThis
Javascript must be enabled to continue!

सदाचारके शिक्षक पुराण

View through CrossRef
आचार: परमोधर्म: सर्वेषामिति निश्चय।       हिनाचारी पवित्रात्मा प्रेत्यचेह विनश्यति ॥       सनातन धर्मके ग्रंथ सर्वोत्तम शिक्षक हैं। उनका अध्येता कभी दुराचारी नहीं सकता। हमारे ग्रंथ सामान्य पुस्तकें नहीं है। वेदोको छोडकर उन सभी ग्रंथोका निर्माण ऋषिमुनियोंने किया है। उनमें अनेकों रहस्य विद्यमान है। यदि वो समाजके सामने प्रकाशित करेगे तो समाजमें व्याप्त दुराचारको हम सदाचारमें परिवर्तित कर सकेंगे।       समाजमें वेदों उपनिषदों ब्राह्मणग्रन्थ ,स्मृतियां और पुराणोंके  ज्ञानका अभाव स्पष्ट रूपसे दिखाई दे रहा है। सदाचारोंको छोडकर समाजके पास आज सब कुछ है। विष्णुधर्मोतरपुराणने कहा है, आचार हिंन न पुनन्ति वेदा:। आचारहीनको वेद भी पवित्र नहीं कर सकते।       सभी आर्षग्रंथोसे प्रेरणा लेकर पुराणोंकी रचना हुई है। पुराणोंमें पदपद पर सदाचारकी शिक्षा दी है। जिसमें समाजके लिए सहस्त्र कथाएं भी दी गई है। विष्णुपुराणमें सदाचारका अर्थ बताया गया है कि – साधव: क्षीणदोषास्तु सच्छब्द: साधुवाचक:। तेषामाचरणं यत्तु सदाचारस्स उच्यते ॥
Vedant Knowledge Systems Private Limited
Title: सदाचारके शिक्षक पुराण
Description:
आचार: परमोधर्म: सर्वेषामिति निश्चय।       हिनाचारी पवित्रात्मा प्रेत्यचेह विनश्यति ॥       सनातन धर्मके ग्रंथ सर्वोत्तम शिक्षक हैं। उनका अध्येता कभी दुराचारी नहीं सकता। हमारे ग्रंथ सामान्य पुस्तकें नहीं है। वेदोको छोडकर उन सभी ग्रंथोका निर्माण ऋषिमुनियोंने किया है। उनमें अनेकों रहस्य विद्यमान है। यदि वो समाजके सामने प्रकाशित करेगे तो समाजमें व्याप्त दुराचारको हम सदाचारमें परिवर्तित कर सकेंगे।       समाजमें वेदों उपनिषदों ब्राह्मणग्रन्थ ,स्मृतियां और पुराणोंके  ज्ञानका अभाव स्पष्ट रूपसे दिखाई दे रहा है। सदाचारोंको छोडकर समाजके पास आज सब कुछ है। विष्णुधर्मोतरपुराणने कहा है, आचार हिंन न पुनन्ति वेदा:। आचारहीनको वेद भी पवित्र नहीं कर सकते।       सभी आर्षग्रंथोसे प्रेरणा लेकर पुराणोंकी रचना हुई है। पुराणोंमें पदपद पर सदाचारकी शिक्षा दी है। जिसमें समाजके लिए सहस्त्र कथाएं भी दी गई है। विष्णुपुराणमें सदाचारका अर्थ बताया गया है कि – साधव: क्षीणदोषास्तु सच्छब्द: साधुवाचक:। तेषामाचरणं यत्तु सदाचारस्स उच्यते ॥.

Related Results

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षक उत्तरदायित्व: एक विश्लेषण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षक उत्तरदायित्व: एक विश्लेषण
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 भारत के शैक्षिक परिदृश्य में एक परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है, जिसका लक्ष्य देश की शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के वैश्विक मानकों के अनुरूप बनान...
इतिहास शिक्षण का निर्णायक उपकरण शिक्षक
इतिहास शिक्षण का निर्णायक उपकरण शिक्षक
किसी विषय का शिक्षण एक कला है । जो विषय की प्रकृति के अनुसार बदलती रहती है । इसलिए विषय शिक्षक, कक्षा में शिक्षण के क्रम में विषय की अवधारणाओं को समझाने के दौरान कई चुनौतियों से रू...
शिक्षक प्रशिक्षुओं की पंचकोषीय अवधारणा
शिक्षक प्रशिक्षुओं की पंचकोषीय अवधारणा
सार पंचकोष शब्द संस्कृत से लिया गया है जिसका तात्पर्य मानव अस्तित्व के पाँच कोषों से है जो अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष हैं। यजुर्वेद में तैत्ति...
नेपाली विषयमा सिकाइ उपलब्धि कम हुनुका कारणहरूको अध्ययन
नेपाली विषयमा सिकाइ उपलब्धि कम हुनुका कारणहरूको अध्ययन
प्रस्तुत लेख भाषा शिक्षणको प्रयोजनसँग सम्बन्धित रहेको छ । यस लेखमा मिश्रित (गुणात्मक तथा परिमाणात्मक ढाँचा र वर्णनात्मक विधिअन्तर्गत रही क्षेत्रीय अध्ययन विधिको अवलम्बन गरेर नतिजा ...
पाठ्येतर बालसाहित्यको शैक्षणिक उपयोग तालिम आवश्यकता
पाठ्येतर बालसाहित्यको शैक्षणिक उपयोग तालिम आवश्यकता
प्रस्तुत अध्ययन भिगोत्स्कीद्वारा प्रतिपादित सामाजिक–सांस्कृतिक सिद्धान्त (सन् १९७८) लाई सैद्धान्तिक आधार मानी विद्यालयीय परिवेशमा बालबालिकाको भाषिक सिप विकासका लागि पाठ्येतर बालसाह...
सार्वजनिक शिक्षाको सबलीकरणका उपायहरू
सार्वजनिक शिक्षाको सबलीकरणका उपायहरू
प्रस्तुत लेख सार्वजनिक शिक्षाको सबलीकरणसँग सम्बन्धित छ । यसमा सार्वजनिक विद्यालयमा हुने शिक्षण सिकाइलाई प्रभावकारी बनाउन अपनाउनु पर्ने उपायहरू सुझाइएको छ । यस क्रममा शिक्षक, विद्या...
नेपाली संस्कृतिमा प्रचलित पूर्णकलशको ऐतिहासिक विवेचना {Historical Analysis of Purnakalash in Nepalese Culture}
नेपाली संस्कृतिमा प्रचलित पूर्णकलशको ऐतिहासिक विवेचना {Historical Analysis of Purnakalash in Nepalese Culture}
जल प्राण वाहिनी शक्ति हो । पवित्रताको प्रतीक हो । जल बगेको, जमेकोवा पात्रमा संकलन गरिएको जस्तो स्वरुपमा रहे पनि सो पवित्र मानिन्छ र मानवसँग विभिन्न रुपमा प्रतक्ष सम्बन्ध राख्दछ । ज...
सीता—हरण खण्डकाव्यमा ईश्वर
सीता—हरण खण्डकाव्यमा ईश्वर
वाल्मीकि रामायणको विषयवस्तुलाई उपजीव्य बनाएर लेखिएको लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाको ।सीता—हरण खण्डकाव्यमा ईश्वर’ नामक प्रस्तुत लेखमा ।सीता–हरण’ खण्डकाव्यअन्तर्गत ईश्वरीय स्वरूपका विषयमा व...

Back to Top