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दलित चेतना और हिन्दी पत्रकारिता
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हिन्दी दलित पत्रकारिता का इतिहास लगभग 150 वर्शों से भी अधिक पुराना है। दलित पत्रकारिता की षुरूआत मराठी भाशा में प्रकाषित पत्रिकाओं के माध्यम से हुई। कालांतर में हिन्दी भाशा में भी इसका प्रकाषन आरंभ हुआ, जो अपनी भूमिका को जिम्मेदारी से निभाते आ रहा है। भारतवर्श में हिन्दू मुस्लिम, सिक्ख, जैन, बौद्ध ईसाई आदि धर्मों के मानने वलो सदियों से निवास करते जा रहे है। किन्तु वर्ण-व्यवस्था जैसी व्यवस्था केवल हिन्दू समाज में पायी जाती है।
Granthaalayah Publications and Printers
Title: दलित चेतना और हिन्दी पत्रकारिता
Description:
हिन्दी दलित पत्रकारिता का इतिहास लगभग 150 वर्शों से भी अधिक पुराना है। दलित पत्रकारिता की षुरूआत मराठी भाशा में प्रकाषित पत्रिकाओं के माध्यम से हुई। कालांतर में हिन्दी भाशा में भी इसका प्रकाषन आरंभ हुआ, जो अपनी भूमिका को जिम्मेदारी से निभाते आ रहा है। भारतवर्श में हिन्दू मुस्लिम, सिक्ख, जैन, बौद्ध ईसाई आदि धर्मों के मानने वलो सदियों से निवास करते जा रहे है। किन्तु वर्ण-व्यवस्था जैसी व्यवस्था केवल हिन्दू समाज में पायी जाती है।.
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