Search engine for discovering works of Art, research articles, and books related to Art and Culture
ShareThis
Javascript must be enabled to continue!

नवेन्दु महर्षि के काव्य में प्रेम-तत्व की प्रधानता

View through CrossRef
भारतीय साहित्य का प्राण-तत्व प्रेम रहा है। प्रेम को केन्द्रीय तत्व मानकर अनेक महाकाव्य एवं महत्वपूर्ण रचनाएँ हुई हैं। परंतु दलित साहित्य में प्रेम-तत्व को स्थापित करनेवाले रचनाकारोें में से एक नवेन्दु महर्षि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वस्तुतः दलित साहित्य भोगे हुए यथार्थ एवं अपनी अनुभूति को केन्द्रीयता प्रदान करते हुए आगे बढ़ता है। वैसी स्थिति में प्रेम को दलित साहित्य में कम ही स्थान मिल पाता है। लेकिन नवेन्दु महर्षि की कविताएँ प्रेम को केन्द्रीयता प्रदान करती हैं तथा मानवीय जीवन में प्रेम की स्थापना ही उनकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य रहा है। इस शोध-पत्र के माध्यम से नवेन्दु महर्षि के काव्य में प्रेम-तत्व की प्रधानता को रेखांकित करने एवं उसके वैशिष्ट्य को उदघाटित करने का प्रयास किया गया है।
Title: नवेन्दु महर्षि के काव्य में प्रेम-तत्व की प्रधानता
Description:
भारतीय साहित्य का प्राण-तत्व प्रेम रहा है। प्रेम को केन्द्रीय तत्व मानकर अनेक महाकाव्य एवं महत्वपूर्ण रचनाएँ हुई हैं। परंतु दलित साहित्य में प्रेम-तत्व को स्थापित करनेवाले रचनाकारोें में से एक नवेन्दु महर्षि का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वस्तुतः दलित साहित्य भोगे हुए यथार्थ एवं अपनी अनुभूति को केन्द्रीयता प्रदान करते हुए आगे बढ़ता है। वैसी स्थिति में प्रेम को दलित साहित्य में कम ही स्थान मिल पाता है। लेकिन नवेन्दु महर्षि की कविताएँ प्रेम को केन्द्रीयता प्रदान करती हैं तथा मानवीय जीवन में प्रेम की स्थापना ही उनकी कविताओं का मुख्य उद्देश्य रहा है। इस शोध-पत्र के माध्यम से नवेन्दु महर्षि के काव्य में प्रेम-तत्व की प्रधानता को रेखांकित करने एवं उसके वैशिष्ट्य को उदघाटित करने का प्रयास किया गया है।.

Related Results

कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
हिन्दी की सुविख्यात लेखिका कृष्णा सोबती जी ने अपने उपन्यासों में अधिकतर समाज के मध्यवर्ग को चित्रित किया है। जिसके अन्तर्गत उच्च मध्यवर्ग व मध्यवर्ग दोनों का ही समावेश है। मध्यवर्ग...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन ...
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
1947 में भारत को आजादी मिली थी। देश के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के उपरान्त मिला था, किन्तु कुछ साल पहले तक अभिव्यक्ति के ...
Kirtilata ka punarpath
Kirtilata ka punarpath
भारतीय वाङ्ग्मय में राजप्रशस्ति काव्यों की अविछिन्न परंपरा रही है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में पाणिनी के ‘पातालविजय’ और ‘जम्बावतीविजय’ से लेकर वामन, उदभट्ट, धनंजय के ‘दसरूपक’ से होत...
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
सूचना का अधिकार (RTI) आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रशासनिक कार्यप्रण...
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
सामाजिक मूल्य वे सिद्धांत हैं जो किसी भी समाज में लोगों के व्यवहार और क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये मूल्य सामाजिक व्यवहार, संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होते हैं औ...
ऋग्वेद में वर्णित विविध चिकित्सा
ऋग्वेद में वर्णित विविध चिकित्सा
वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा पद्धति अपने सर्वोत्तम युग में है परन्तु उसकी जड़ें प्राचीन चिकित्सा पद्धति से होकर ही यहाँ तक पहुँची हैं, जिनमें वेदों का विशेष योगदान रहा है, प्रमुख...
उत्तराखंड के संस्कृत महाविद्यालयों में संचालित शिक्षा व्यवस्था का समीक्षात्मक अध्ययन
उत्तराखंड के संस्कृत महाविद्यालयों में संचालित शिक्षा व्यवस्था का समीक्षात्मक अध्ययन
‘भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा’ संस्कृत भाषा, न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत की संग्राहिका है प्रत्युत् यह भारतीय आध्यात्मिकता की प्रवाहिका भी है। संस्कृत के इस म...

Back to Top