Javascript must be enabled to continue!
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
View through CrossRef
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन तमाम परम्पराओं और निष्ठाओं की समीक्षा की है। लेखिका ने अपने उपन्यासों में ज्यादातर मध्यवगीर्य परिवार, अपनी नैतिक अवस्थाओं का चित्रण प्रस्तुत किया है। जैसे, बड़ों का सम्मान करना, लाज लिहाज रखना, सेवा सत्कार करना, अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपनी शक्ति भर कोशिश करना इत्यादि। यह उपन्यास की मुख्य समस्या पाशो की है। इसमें परम्पराओं और रूढ़ियों से जकड़ी ‘पाशो’ के फिसल जाने पर उसके भटकने की कहानी है। ‘पाशो’ एक बार डार से बिछुड़ गई तो बहुत सारे कँटीले रास्तें, पगडंडियों से गुजरना पड़ा था। ‘डार से बिछुड़ी अर्थात्सामाजिक वर्जनाओं और परिवार के कायदे कानूनों की गिरफ्त से छुट्टी नारी। पर पुरुष प्रधान समाज में एक अबला नारी की पुकार कौन सुनता है। इस उपन्यास में मानवीय नैतिक मूल्य के रूप में शेखजी को दर्शाया गया है। ‘मित्रो मरजानी’ उपन्यास में लेखिका ने एक ऐसी नारी को प्रस्तुत किया है जो ‘मित्रो’, सरदारीलाल की पत्नी होते हुए भी वह कामशक्ति और निर्लज्जता से त्रस्त है और विलास, राग-रंग में डूबी, चिढ़ने और चिढ़ाने में व्यस्त है। वैसे तो लेखिका ने उसे खुले दिल की महिला के रूप में दिखाया हैं। ‘मित्रो’, एक ओर प्रचंड विद्रोही है तो दूसरी ओर विवेक और मानवीय मूल्यों में अगाध आस्था रखती है। आदर्श का मोह और समाज के भय को हिम्मत से ठुकराने वाली ‘मित्रो’ अपने पति से यौन तुष्टि न होने पर नैतिकताको चुन्नौति देने वाली नारी के रूप में प्रस्तुत किया है। ‘यारों के यार’ उपन्यास में भी कृष्णाजी ने शहरी और दफ्तरी जीवन के यथार्थ के जरिए नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पतन और साथ-साथ नौकरी पेशा मिस तमाशा जैसी टाइपिस्ट नारी को प्रस्तुत किया है जो अधिक से अधिक धनार्जन हेतु कॉल गर्ल बन जाती है। ‘तिन पहाड़’ उपन्यास में लेखिका ने जया के जरिए एक ऐसी नारी का जीवन प्रस्तुत किया है जो मंगेतर होने पर भी ठुकराया जाता है, पुत्री तथा पुत्रवधु के रूप में प्राप्त अधिकार से वंचित कराया जाता है। यह तिन पहाड़ तीन सदमों के प्रतीक है। पहला ‘एडना’ से विवाह कर श्री द्वारा मंगेतर को ठुकरा दिया जाना दूसरा-पहले पुत्री तथा बाद में पुत्रवधु के रूप में जया श्री के साथ विवाह और तीसरा-तपन से जुड़ने की चाह को इस उपन्यास में दर्शाया गया है। ‘सूरजमुखी अँधेरे के’ उपन्यास में भी लेखिका ने नैतिक मूल्य समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें बचपन में बलात्कारित ‘रत्ती’ की मानसिक स्थिति को लेकर प्रस्तुत किया गया है। इसमें बचपन में बलात्कारित रत्ती के जरिए ऐसी नारी को चित्रित किया है जो कटु स्मृति को चाहकर भी भूल नहीं पाती, जो एकान्त प्रिय, मजबूत और निडर भी है और जिसे जीवन की असफलताओं से गुजर कर भविष्य की आशाओं की सूरजमुखी उगाने, चाहने और पाने की कहानी है। इस उपन्यास में रत्ती के लिए सभी नैतिक मूल्य झूठे सिद्ध होते हैं। लेखिका ने अपने उपन्यासों में नैतिक मूल्य और रूढ़ि परम्पराओं को चित्रित किया है।
Granthaalayah Publications and Printers
Title: कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
Description:
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन तमाम परम्पराओं और निष्ठाओं की समीक्षा की है। लेखिका ने अपने उपन्यासों में ज्यादातर मध्यवगीर्य परिवार, अपनी नैतिक अवस्थाओं का चित्रण प्रस्तुत किया है। जैसे, बड़ों का सम्मान करना, लाज लिहाज रखना, सेवा सत्कार करना, अपने सतीत्व की रक्षा के लिए अपनी शक्ति भर कोशिश करना इत्यादि। यह उपन्यास की मुख्य समस्या पाशो की है। इसमें परम्पराओं और रूढ़ियों से जकड़ी ‘पाशो’ के फिसल जाने पर उसके भटकने की कहानी है। ‘पाशो’ एक बार डार से बिछुड़ गई तो बहुत सारे कँटीले रास्तें, पगडंडियों से गुजरना पड़ा था। ‘डार से बिछुड़ी अर्थात्सामाजिक वर्जनाओं और परिवार के कायदे कानूनों की गिरफ्त से छुट्टी नारी। पर पुरुष प्रधान समाज में एक अबला नारी की पुकार कौन सुनता है। इस उपन्यास में मानवीय नैतिक मूल्य के रूप में शेखजी को दर्शाया गया है। ‘मित्रो मरजानी’ उपन्यास में लेखिका ने एक ऐसी नारी को प्रस्तुत किया है जो ‘मित्रो’, सरदारीलाल की पत्नी होते हुए भी वह कामशक्ति और निर्लज्जता से त्रस्त है और विलास, राग-रंग में डूबी, चिढ़ने और चिढ़ाने में व्यस्त है। वैसे तो लेखिका ने उसे खुले दिल की महिला के रूप में दिखाया हैं। ‘मित्रो’, एक ओर प्रचंड विद्रोही है तो दूसरी ओर विवेक और मानवीय मूल्यों में अगाध आस्था रखती है। आदर्श का मोह और समाज के भय को हिम्मत से ठुकराने वाली ‘मित्रो’ अपने पति से यौन तुष्टि न होने पर नैतिकताको चुन्नौति देने वाली नारी के रूप में प्रस्तुत किया है। ‘यारों के यार’ उपन्यास में भी कृष्णाजी ने शहरी और दफ्तरी जीवन के यथार्थ के जरिए नौकरशाही, भ्रष्टाचार, पतन और साथ-साथ नौकरी पेशा मिस तमाशा जैसी टाइपिस्ट नारी को प्रस्तुत किया है जो अधिक से अधिक धनार्जन हेतु कॉल गर्ल बन जाती है। ‘तिन पहाड़’ उपन्यास में लेखिका ने जया के जरिए एक ऐसी नारी का जीवन प्रस्तुत किया है जो मंगेतर होने पर भी ठुकराया जाता है, पुत्री तथा पुत्रवधु के रूप में प्राप्त अधिकार से वंचित कराया जाता है। यह तिन पहाड़ तीन सदमों के प्रतीक है। पहला ‘एडना’ से विवाह कर श्री द्वारा मंगेतर को ठुकरा दिया जाना दूसरा-पहले पुत्री तथा बाद में पुत्रवधु के रूप में जया श्री के साथ विवाह और तीसरा-तपन से जुड़ने की चाह को इस उपन्यास में दर्शाया गया है। ‘सूरजमुखी अँधेरे के’ उपन्यास में भी लेखिका ने नैतिक मूल्य समस्याओं पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें बचपन में बलात्कारित ‘रत्ती’ की मानसिक स्थिति को लेकर प्रस्तुत किया गया है। इसमें बचपन में बलात्कारित रत्ती के जरिए ऐसी नारी को चित्रित किया है जो कटु स्मृति को चाहकर भी भूल नहीं पाती, जो एकान्त प्रिय, मजबूत और निडर भी है और जिसे जीवन की असफलताओं से गुजर कर भविष्य की आशाओं की सूरजमुखी उगाने, चाहने और पाने की कहानी है। इस उपन्यास में रत्ती के लिए सभी नैतिक मूल्य झूठे सिद्ध होते हैं। लेखिका ने अपने उपन्यासों में नैतिक मूल्य और रूढ़ि परम्पराओं को चित्रित किया है।.
Related Results
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
हिन्दी की सुविख्यात लेखिका कृष्णा सोबती जी ने अपने उपन्यासों में अधिकतर समाज के मध्यवर्ग को चित्रित किया है। जिसके अन्तर्गत उच्च मध्यवर्ग व मध्यवर्ग दोनों का ही समावेश है। मध्यवर्ग...
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
1947 में भारत को आजादी मिली थी। देश के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के उपरान्त मिला था, किन्तु कुछ साल पहले तक अभिव्यक्ति के ...
मानवतावादी जीवनदृष्टि: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में
मानवतावादी जीवनदृष्टि: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में
मानवतावादी जीवनदृष्टि में व्यष्टिगत् और समष्टिगत जीवन विकास के आदर्श निहित हैं। यह मनुष्य जीवन को इस धरती पर अति विशिष्ट जीवन के रूप में स्वीकारती है एवं मानव, प्रकृति और परमात्मा ...
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
सूचना का अधिकार (RTI) आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रशासनिक कार्यप्रण...
Kirtilata ka punarpath
Kirtilata ka punarpath
भारतीय वाङ्ग्मय में राजप्रशस्ति काव्यों की अविछिन्न परंपरा रही है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में पाणिनी के ‘पातालविजय’ और ‘जम्बावतीविजय’ से लेकर वामन, उदभट्ट, धनंजय के ‘दसरूपक’ से होत...
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
सामाजिक मूल्य वे सिद्धांत हैं जो किसी भी समाज में लोगों के व्यवहार और क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये मूल्य सामाजिक व्यवहार, संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होते हैं औ...
confluence of mystery and love in Hindi fiction : Analysis of thrillers, fiction and romantic novels
confluence of mystery and love in Hindi fiction : Analysis of thrillers, fiction and romantic novels
यह शोधपत्र हिंदी कथा साहित्य में थ्रिलर, फिक्शन और रोमांटिक उपन्यासों में प्रकट होने वाले रहस्य और प्रेम के संगम का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि कैसे इन उपन्...
ऋग्वेद में वर्णित विविध चिकित्सा
ऋग्वेद में वर्णित विविध चिकित्सा
वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा पद्धति अपने सर्वोत्तम युग में है परन्तु उसकी जड़ें प्राचीन चिकित्सा पद्धति से होकर ही यहाँ तक पहुँची हैं, जिनमें वेदों का विशेष योगदान रहा है, प्रमुख...

