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वैदिकव्यवस्था में शिक्षण और सामाजिक जीवन की अवधारणा
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में ,वाणी राष्ट्री ईश्वरी और वसुओं को एकत्रित करनेवाली हूँ | पर ब्रह्मतत्व का साक्षात्कार करनेवाली में यजन करने योग्य देवता गण में अग्रगण्य हूँ |
वेदों की महिमा अनंत है | मनुष्य जीवन में धर्म – अर्थ- काम –मोक्ष जैसेचतुर्विध पुरुषार्थ की प्राप्ति के लिए वेदों की जानकारी अति आवश्यक है| मेक्समूलर महोदय ने सही कहा है की “जब मनुष्य अपने वंश के इतिहास के बारे में रस और रूचि रखेगा और जब तक हम ग्रंथालयों और संग्राहलयों में प्राचीन युगों के अवशेषों को संग्रहीत करेगें ,तब तक आर्यजाति के मानवों के संस्मरण से युक्त पुस्तकों की श्रेणी में प्रथम स्थान ऋग्वेद का ही रहेगा ‘| (1) मनुस्मृति में वेदों का महत्व बताते हुए कहा गया है की मनुष्य कों आलस त्याग कर वेद का ही यथाकाल सतत अभ्यास करना चाहिए | (2) शतपथ ब्राह्मण में भी वेदों के अध्ययन की महत्ता बताई गई है| (3)
Title: वैदिकव्यवस्था में शिक्षण और सामाजिक जीवन की अवधारणा
Description:
में ,वाणी राष्ट्री ईश्वरी और वसुओं को एकत्रित करनेवाली हूँ | पर ब्रह्मतत्व का साक्षात्कार करनेवाली में यजन करने योग्य देवता गण में अग्रगण्य हूँ |
वेदों की महिमा अनंत है | मनुष्य जीवन में धर्म – अर्थ- काम –मोक्ष जैसेचतुर्विध पुरुषार्थ की प्राप्ति के लिए वेदों की जानकारी अति आवश्यक है| मेक्समूलर महोदय ने सही कहा है की “जब मनुष्य अपने वंश के इतिहास के बारे में रस और रूचि रखेगा और जब तक हम ग्रंथालयों और संग्राहलयों में प्राचीन युगों के अवशेषों को संग्रहीत करेगें ,तब तक आर्यजाति के मानवों के संस्मरण से युक्त पुस्तकों की श्रेणी में प्रथम स्थान ऋग्वेद का ही रहेगा ‘| (1) मनुस्मृति में वेदों का महत्व बताते हुए कहा गया है की मनुष्य कों आलस त्याग कर वेद का ही यथाकाल सतत अभ्यास करना चाहिए | (2) शतपथ ब्राह्मण में भी वेदों के अध्ययन की महत्ता बताई गई है| (3).
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