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अनामिका की कविता में स्त्री विमर्श के विविध आयाम

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अनामिका की कविताओं में स्त्री विमर्श के विविध आयाम के संदर्भ में देखा जा सकता है जिसमें स्त्री विमर्श के आधारभूत कारणों के रूप में अनामिका का स्त्री विमर्श की अवधारणा, स्वरूप और स्त्री विमर्श, परिभाषा एवं चेतना के संदर्भ को गहरे भाव बोध के साथ दर्शाया गया है। जिसमें बदलते परिवेश, टूटते मूल्य और विखंडित होते संयुक्त परिवार, अकेलेपन का संत्रास, स्त्री पुरुष के संबंधों में आई ठंडक अनामिका की कविताओं की विशेषता है। यूं देखा जाए तो हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को एक व्यापक फलक पर देखा जा सकता है। साहित्य आंदोलन में स्त्री अस्मिता को केंद्र में रख कर संगठित रूप से रचा गया साहित्य स्त्री विमर्श है। स्त्री विमर्श सत्ता के समीकरण और संतुलन के लिए संघर्षरत साहित्य है जो अपने अधिकार एवं सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है स इस विमर्श में पितृसत्तात्मक विचारधारा का विरोध ही नहीं बल्कि स्त्रियों के सामाजिक, मानसिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्तर पर समानाधिकार की मांग करता है। 
Title: अनामिका की कविता में स्त्री विमर्श के विविध आयाम
Description:
अनामिका की कविताओं में स्त्री विमर्श के विविध आयाम के संदर्भ में देखा जा सकता है जिसमें स्त्री विमर्श के आधारभूत कारणों के रूप में अनामिका का स्त्री विमर्श की अवधारणा, स्वरूप और स्त्री विमर्श, परिभाषा एवं चेतना के संदर्भ को गहरे भाव बोध के साथ दर्शाया गया है। जिसमें बदलते परिवेश, टूटते मूल्य और विखंडित होते संयुक्त परिवार, अकेलेपन का संत्रास, स्त्री पुरुष के संबंधों में आई ठंडक अनामिका की कविताओं की विशेषता है। यूं देखा जाए तो हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श को एक व्यापक फलक पर देखा जा सकता है। साहित्य आंदोलन में स्त्री अस्मिता को केंद्र में रख कर संगठित रूप से रचा गया साहित्य स्त्री विमर्श है। स्त्री विमर्श सत्ता के समीकरण और संतुलन के लिए संघर्षरत साहित्य है जो अपने अधिकार एवं सम्मान की लड़ाई लड़ रहा है स इस विमर्श में पितृसत्तात्मक विचारधारा का विरोध ही नहीं बल्कि स्त्रियों के सामाजिक, मानसिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्तर पर समानाधिकार की मांग करता है। .

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