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भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का STEM शिक्षा में एकीकरण: प्री-सेवा एवं सेवा-रत अध्यापकों के बीच जागरूकता, दृष्टिकोण एवं व्यवहार का सर्वेक्षण अध्ययन

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भारत की शैक्षिक और वैज्ञानिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है, जिसमें गणित, खगोलशास्त्र, धातु विज्ञान, चिकित्सा, वास्तुकला, कृषि और पर्यावरणीय संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान शामिल है। इस संपूर्ण ज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems - IKS) कहा जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में IKS के औपचारिक शिक्षा में एकीकरण पर बल दिया गया है, विशेषकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियान्त्रिकी और गणित (STEM) शिक्षा में, ताकि विद्यार्थियों का सीखने का अनुभव संदर्भित (contextualized), बहु-विषयक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ हो। हालाँकि, किसी भी शैक्षिक सुधार के सफल क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि होती है। शिक्षक यदि IKS के बारे में जागरूक, सकारात्मक दृष्टिकोण वाले और इसे कक्षा में लागू करने में सक्षम होंगे तभी नीति का उद्देश्य पूरा होगा। इस पृष्ठभूमि में यह सर्वेक्षण-आधारित शोध किया गया, जिसका उद्देश्य प्री-सेवा (pre-service) और सेवा-रत (in-service) STEM शिक्षकों में IKS के प्रति जागरूकता, दृष्टिकोण और व्यवहारिक एकीकरण का आकलन करना था। इस अध्ययन में वर्णनात्मक सर्वेक्षण डिज़ाइन का उपयोग किया गया। नमूना 200 प्रतिभागियों (100 प्री-सेवा और 100 सेवा-रत STEM शिक्षक) का था, जिन्हें पाँच राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम—से उद्देश्यपूर्ण नमूना चयन (purposive sampling) द्वारा चुना गया। डेटा संग्रह के लिए IKS–STEM जागरूकता एवं एकीकरण सूचकांक (α = 0.87) का उपयोग किया गया, जिसमें तीन उपमापनी थीं: (1) जागरूकता (10 प्रश्न, 0–50 अंक), (2) दृष्टिकोण (10 प्रश्न, 0–50 अंक), (3) व्यवहार/अभ्यास (5 प्रश्न, पिछले माह की आवृत्ति)। डेटा का विश्लेषण Excel में वर्णनात्मक आँकड़े, स्वतंत्र t-परीक्षण और पियर्सन सहसंबंध द्वारा किया गया। परिणामों से पता चला कि समग्र रूप से शिक्षकों में IKS के प्रति जागरूकता मध्यम स्तर की थी (M = 32.8, SD = 6.4) और दृष्टिकोण उच्च स्तर का था (M = 43.2, SD = 5.7)। सेवा-रत शिक्षक जागरूकता में प्री-सेवा शिक्षकों से सांख्यिकीय रूप से अधिक अंक प्राप्त करते हैं (t = 3.42, p < .01), जबकि दृष्टिकोण और व्यवहार में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। जागरूकता और व्यवहार के बीच मध्यम सकारात्मक सहसंबंध (r = .46, p < .01) पाया गया। अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि यद्यपि IKS के प्रति दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक है, लेकिन उसका वास्तविक कक्षा-कक्ष में उपयोग सीमित है। इसका मुख्य कारण पाठ्यचर्या-उन्मुख सामग्री का अभाव और व्यावहारिक शिक्षण-रणनीतियों की कमी है। इस शोध से यह निष्कर्ष निकाला गया कि NEP 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पाठ्यपुस्तकों में IKS उदाहरणों का समावेश, खुले स्रोत (open-source) संसाधन बैंक और शिक्षकों के लिए सहयोगी मंच विकसित करना आवश्यक है।
Title: भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का STEM शिक्षा में एकीकरण: प्री-सेवा एवं सेवा-रत अध्यापकों के बीच जागरूकता, दृष्टिकोण एवं व्यवहार का सर्वेक्षण अध्ययन
Description:
भारत की शैक्षिक और वैज्ञानिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है, जिसमें गणित, खगोलशास्त्र, धातु विज्ञान, चिकित्सा, वास्तुकला, कृषि और पर्यावरणीय संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान शामिल है। इस संपूर्ण ज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems - IKS) कहा जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में IKS के औपचारिक शिक्षा में एकीकरण पर बल दिया गया है, विशेषकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियान्त्रिकी और गणित (STEM) शिक्षा में, ताकि विद्यार्थियों का सीखने का अनुभव संदर्भित (contextualized), बहु-विषयक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ हो। हालाँकि, किसी भी शैक्षिक सुधार के सफल क्रियान्वयन में शिक्षक की भूमिका सर्वोपरि होती है। शिक्षक यदि IKS के बारे में जागरूक, सकारात्मक दृष्टिकोण वाले और इसे कक्षा में लागू करने में सक्षम होंगे तभी नीति का उद्देश्य पूरा होगा। इस पृष्ठभूमि में यह सर्वेक्षण-आधारित शोध किया गया, जिसका उद्देश्य प्री-सेवा (pre-service) और सेवा-रत (in-service) STEM शिक्षकों में IKS के प्रति जागरूकता, दृष्टिकोण और व्यवहारिक एकीकरण का आकलन करना था। इस अध्ययन में वर्णनात्मक सर्वेक्षण डिज़ाइन का उपयोग किया गया। नमूना 200 प्रतिभागियों (100 प्री-सेवा और 100 सेवा-रत STEM शिक्षक) का था, जिन्हें पाँच राज्यों—दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम—से उद्देश्यपूर्ण नमूना चयन (purposive sampling) द्वारा चुना गया। डेटा संग्रह के लिए IKS–STEM जागरूकता एवं एकीकरण सूचकांक (α = 0.
87) का उपयोग किया गया, जिसमें तीन उपमापनी थीं: (1) जागरूकता (10 प्रश्न, 0–50 अंक), (2) दृष्टिकोण (10 प्रश्न, 0–50 अंक), (3) व्यवहार/अभ्यास (5 प्रश्न, पिछले माह की आवृत्ति)। डेटा का विश्लेषण Excel में वर्णनात्मक आँकड़े, स्वतंत्र t-परीक्षण और पियर्सन सहसंबंध द्वारा किया गया। परिणामों से पता चला कि समग्र रूप से शिक्षकों में IKS के प्रति जागरूकता मध्यम स्तर की थी (M = 32.
8, SD = 6.
4) और दृष्टिकोण उच्च स्तर का था (M = 43.
2, SD = 5.
7)। सेवा-रत शिक्षक जागरूकता में प्री-सेवा शिक्षकों से सांख्यिकीय रूप से अधिक अंक प्राप्त करते हैं (t = 3.
42, p < .
01), जबकि दृष्टिकोण और व्यवहार में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया। जागरूकता और व्यवहार के बीच मध्यम सकारात्मक सहसंबंध (r = .
46, p < .
01) पाया गया। अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि यद्यपि IKS के प्रति दृष्टिकोण बहुत सकारात्मक है, लेकिन उसका वास्तविक कक्षा-कक्ष में उपयोग सीमित है। इसका मुख्य कारण पाठ्यचर्या-उन्मुख सामग्री का अभाव और व्यावहारिक शिक्षण-रणनीतियों की कमी है। इस शोध से यह निष्कर्ष निकाला गया कि NEP 2020 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पाठ्यपुस्तकों में IKS उदाहरणों का समावेश, खुले स्रोत (open-source) संसाधन बैंक और शिक्षकों के लिए सहयोगी मंच विकसित करना आवश्यक है।.

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