Javascript must be enabled to continue!
श्री योगी ईश्वरनाथ जी का जीवन परिचय
View through CrossRef
भारतीय इतिहास मे दक्षिण भारत की राष्ट्रकुट/राठौड वंश की कन्नौज (बदायूं) शाखा से आकर मारवाड/जोधपुर में शासन स्थापित करने वाल मारवाड के राठौड वंश के आदिपुरूष रावसिहा जी थे। उन्हीं के वंशज रावजोपसा जी के पुत्र राव धोनग जी राठौड के कुल में सेरणा गाॅव जिला जालोर (राज.) में अवतरित दिव्य महात्मा श्री योगी ईश्वरनाथ जी जिनका जिनकाा जालौर के प्रसिद्ध भेरूनाथ अखाडें में नाथ सम्प्रदाय के दिव्य महात्मा श्री श्री 1008 श्री शान्तिनाथ जी महाराज के पौत्र शिष्य के रूप में विशेष सम्माननीय स्थान प्राप्त है। यह उन्हीं महात्मा का जीवन परिचय है।
Technoscience Academy
Title: श्री योगी ईश्वरनाथ जी का जीवन परिचय
Description:
भारतीय इतिहास मे दक्षिण भारत की राष्ट्रकुट/राठौड वंश की कन्नौज (बदायूं) शाखा से आकर मारवाड/जोधपुर में शासन स्थापित करने वाल मारवाड के राठौड वंश के आदिपुरूष रावसिहा जी थे। उन्हीं के वंशज रावजोपसा जी के पुत्र राव धोनग जी राठौड के कुल में सेरणा गाॅव जिला जालोर (राज.
) में अवतरित दिव्य महात्मा श्री योगी ईश्वरनाथ जी जिनका जिनकाा जालौर के प्रसिद्ध भेरूनाथ अखाडें में नाथ सम्प्रदाय के दिव्य महात्मा श्री श्री 1008 श्री शान्तिनाथ जी महाराज के पौत्र शिष्य के रूप में विशेष सम्माननीय स्थान प्राप्त है। यह उन्हीं महात्मा का जीवन परिचय है।.
Related Results
मानवतावादी जीवनदृष्टि: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में
मानवतावादी जीवनदृष्टि: आधुनिक परिप्रेक्ष्य में
मानवतावादी जीवनदृष्टि में व्यष्टिगत् और समष्टिगत जीवन विकास के आदर्श निहित हैं। यह मनुष्य जीवन को इस धरती पर अति विशिष्ट जीवन के रूप में स्वीकारती है एवं मानव, प्रकृति और परमात्मा ...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन ...
संस्कृत काव्यों में वर्णित वनस्पत्यौषधियों की प्रासंगिकता
संस्कृत काव्यों में वर्णित वनस्पत्यौषधियों की प्रासंगिकता
मनुष्य का जन्म होते ही इस पृथ्वी पर विद्यमान प्रत्येक पर्यावरणीय तत्त्व, मनुष्य के जीवन का अंगभूत हो जाता है। वनस्पति मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। वनस्पतियों का मानव के...
जीवन का सत्य
जीवन का सत्य
प्रायः हमसे यह प्रश्न पूछा जाता है, जीवन का सत्य क्या है ? अथवा जीवन का उद्देश्य क्या है ? अथवा हम जन्म क्यों लेते हैं ? जीवन के उद्देश्य के सन्दर्भ में अधिकतर हमारी अपनी योजना होत...
‘समन्वित चेतना’ का आयामहरूमा जीवन आचार्यका कथाहरू
‘समन्वित चेतना’ का आयामहरूमा जीवन आचार्यका कथाहरू
समयको रङ्गलाई टिपेर गोजीभरि राखी घरि घरि कविताका सुन्दर हरफहरुमा देखाइरहने, घरि घरि कथाका प्लटहरुमा सजाइरहने पत्रकार, कलाकार, कवि, कथाकार स्व. जीवन आचार्य आज हामीहरुको बिचमा छैनन्,...
पंकज मित्रजी से साक्षात्कार
पंकज मित्रजी से साक्षात्कार
साहित्य के क्षेत्र में साहित्य का मूल्यांकन करते हुए सृजनकर्ता के व्यक्तित्व की पहचान आवश्यक बन जाती है, क्योंकि जीवन और साहित्य का अभिन्न संबंध है l कोई भी साहित्यकार कितना भी तटस...
देवयानी खण्डकाव्यमा अङ्गीरसको निरूपण [Description of Angiras in Devyani Khandakavya]
देवयानी खण्डकाव्यमा अङ्गीरसको निरूपण [Description of Angiras in Devyani Khandakavya]
देवयानी खण्डकाव्यमा अङ्गीरसको निरुपण लेखमा सर्वप्रथम कवि र काव्यको सामान्य परिचय दिइएको छ । विषयवस्तु प्रस्ट्याउन अलग अलग शीर्षक राखी विषय परिचयमा विषयवस्तु खुलाउन देवयानी खण्डकाव्...
प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ
प्रेमचंद की कहानियों में सामाजिक यथार्थ
हिंदी साहित्य के इतिहास में मुंशी प्रेमचंद का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से भारतीय समाज की उस सच्चाई को प्रस्तुत किया, जिसे अक्सर उपेक्षित किया जा...

