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संस्कृत काव्यों में वर्णित वनस्पत्यौषधियों की प्रासंगिकता

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मनुष्य का जन्म होते ही इस पृथ्वी पर विद्यमान प्रत्येक पर्यावरणीय तत्त्व, मनुष्य के जीवन का अंगभूत हो जाता है। वनस्पति मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है।  वनस्पतियों का मानव के साथ अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। मानव वनस्पतियों का वर्धन करता है। वनस्पतियों से मानव को जीवन दायिनी प्राणवायु प्राप्त होती है।" वनस्पति के द्वारा ही इस भूतल पर सृष्टि के समस्त प्राणी भोजन प्राप्त कर गतिशील होते हैं। मानव से लेकर समस्त जीव जगत प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप में जन्म से मृत्यु पर्यन्त वनस्पति से जुड़ा रहता है। मनुष्य अपने जीवन के प्रत्येक स्तर पर वनस्पति से जुड़ा हुआ है। मानव जीवन की तीन प्रमुख भोजन, वस्त्र एवं आवास की आवश्यकता भी वनस्पति द्वारा प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है। वनस्पति मनुष्य के जीवन में एक ऐसा उपयोगी स्थान रखती है, जिसे विस्मृत करना संभव नहीं है।
Title: संस्कृत काव्यों में वर्णित वनस्पत्यौषधियों की प्रासंगिकता
Description:
मनुष्य का जन्म होते ही इस पृथ्वी पर विद्यमान प्रत्येक पर्यावरणीय तत्त्व, मनुष्य के जीवन का अंगभूत हो जाता है। वनस्पति मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है।  वनस्पतियों का मानव के साथ अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। मानव वनस्पतियों का वर्धन करता है। वनस्पतियों से मानव को जीवन दायिनी प्राणवायु प्राप्त होती है।" वनस्पति के द्वारा ही इस भूतल पर सृष्टि के समस्त प्राणी भोजन प्राप्त कर गतिशील होते हैं। मानव से लेकर समस्त जीव जगत प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप में जन्म से मृत्यु पर्यन्त वनस्पति से जुड़ा रहता है। मनुष्य अपने जीवन के प्रत्येक स्तर पर वनस्पति से जुड़ा हुआ है। मानव जीवन की तीन प्रमुख भोजन, वस्त्र एवं आवास की आवश्यकता भी वनस्पति द्वारा प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है। वनस्पति मनुष्य के जीवन में एक ऐसा उपयोगी स्थान रखती है, जिसे विस्मृत करना संभव नहीं है।.

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