Search engine for discovering works of Art, research articles, and books related to Art and Culture
ShareThis
Javascript must be enabled to continue!

ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता और सामाजिक गतिशीलता के मध्य संबंध: एक मात्रात्मक अध्ययन।

View through CrossRef
वर्तमान डिजिटल युग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक जीवन के विभिन्न आयामों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का विकास युवाओं के जीवन स्तर, रोजगार अवसरों, शिक्षा, संचार कौशल तथा सामाजिक सहभागिता को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन गया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता और सामाजिक गतिशीलता के मध्य संबंध का विश्लेषण करना है। अध्ययन हेतु मात्रात्मक शोध पद्धति का उपयोग किया गया। 150 ग्रामीण युवाओं का चयन सरल यादृच्छिक निदर्शन विधि द्वारा किया गया। आंकड़ों के संकलन हेतु स्वनिर्मित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया तथा प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत एवं सहसंबंधीय तकनीकों द्वारा किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि उच्च डिजिटल साक्षरता वाले युवाओं में सामाजिक गतिशीलता का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। डिजिटल कौशल, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस सेवाओं की पहुँच तथा डिजिटल रोजगार अवसरों ने ग्रामीण युवाओं के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्ययन यह संकेत करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार सामाजिक परिवर्तन एवं समावेशी विकास को गति प्रदान कर सकता है।
Publication and Advance Research Welfare Society
Title: ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता और सामाजिक गतिशीलता के मध्य संबंध: एक मात्रात्मक अध्ययन।
Description:
वर्तमान डिजिटल युग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ने सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक जीवन के विभिन्न आयामों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता का विकास युवाओं के जीवन स्तर, रोजगार अवसरों, शिक्षा, संचार कौशल तथा सामाजिक सहभागिता को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन गया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं में डिजिटल साक्षरता और सामाजिक गतिशीलता के मध्य संबंध का विश्लेषण करना है। अध्ययन हेतु मात्रात्मक शोध पद्धति का उपयोग किया गया। 150 ग्रामीण युवाओं का चयन सरल यादृच्छिक निदर्शन विधि द्वारा किया गया। आंकड़ों के संकलन हेतु स्वनिर्मित प्रश्नावली का प्रयोग किया गया तथा प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत एवं सहसंबंधीय तकनीकों द्वारा किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि उच्च डिजिटल साक्षरता वाले युवाओं में सामाजिक गतिशीलता का स्तर अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। डिजिटल कौशल, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस सेवाओं की पहुँच तथा डिजिटल रोजगार अवसरों ने ग्रामीण युवाओं के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्ययन यह संकेत करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों का विस्तार सामाजिक परिवर्तन एवं समावेशी विकास को गति प्रदान कर सकता है।.

Related Results

सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
1947 में भारत को आजादी मिली थी। देश के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के उपरान्त मिला था, किन्तु कुछ साल पहले तक अभिव्यक्ति के ...
ग्रामीण समाज में साइबर अपराध
ग्रामीण समाज में साइबर अपराध
ग्रामीण समाज में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाएँ एक गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। इंटरनेट और डिजिटल उपकरणों की पहुँच ने जहाँ ग्रामीण विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं साइबर अपराधों का...
शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में डिजिटल शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की मनोवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन
शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में डिजिटल शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की मनोवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन
वर्तमान युग में डिजिटल शिक्षा शिक्षा-प्रणाली का अभिन्न अंग बन चुकी है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के पश्चात डिजिटल शिक्षण संसाधनों का उपयोग अत्यधिक बढ़ा है। प्रस्तुत शोध का उद्द...
वैदिक संस्कृति में वृक्ष-पूजा: एक अध्ययन
वैदिक संस्कृति में वृक्ष-पूजा: एक अध्ययन
वैदिक वाङ्मय में वृक्षों की उपादेयता को महिमामंडित किया गया है। ऋग्वेद में वृक्षों को वनस्पति (वनों के अधिपति) कहा गया है। वनस्पतियों को देवता केे रूप में ख्याति प्राप्ति करके एक म...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
हिन्दी की सुविख्यात लेखिका कृष्णा सोबती जी ने अपने उपन्यासों में अधिकतर समाज के मध्यवर्ग को चित्रित किया है। जिसके अन्तर्गत उच्च मध्यवर्ग व मध्यवर्ग दोनों का ही समावेश है। मध्यवर्ग...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन ...
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
सूचना का अधिकार (RTI) आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रशासनिक कार्यप्रण...
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
पं० जगन्नाथ के लोक साहित्य में सामाजिक मूल्य
सामाजिक मूल्य वे सिद्धांत हैं जो किसी भी समाज में लोगों के व्यवहार और क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये मूल्य सामाजिक व्यवहार, संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होते हैं औ...

Back to Top