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बुंदेलखंड के साहित्य जगत में महिला साहित्यकारों की भूमिका
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भारतीय साहित्य जगत में बुंदेलखंड साहित्य का महत्वपूर्ण स्थान है। बुंदेलखंडी संस्कृति को सजाने संवारने में यहां के क्षेत्रीय रचनाकारों का अभूतपूर्व योगदान प्रत्यक्ष रुप से दृष्टिगत है। पुरुषों के समकक्ष ही महिला साहित्यकारों की एक बड़ी सूची साहित्य जगत में दर्ज है। जिन्होंने अनेकों भजन कीर्तन पद सवैया लेख उपन्यास आदि से साहित्य जगत को सुशोभित किया है। बुंदेलखंड की महिला साहित्यकारों ने घर के चार दिवारी से निकलकर अपनी विद्वत्ता का परिचय दिया है। 17वीं शताब्दी से लेकर राय प्रवीण , केशव पुत्र वधू, तीन तरंग , मीराबाई , डॉ माया सिंह और फिर मैत्रे पुष्पा तक महिला साहित्यकारों का सफर अनवरत जारी है।
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Title: बुंदेलखंड के साहित्य जगत में महिला साहित्यकारों की भूमिका
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भारतीय साहित्य जगत में बुंदेलखंड साहित्य का महत्वपूर्ण स्थान है। बुंदेलखंडी संस्कृति को सजाने संवारने में यहां के क्षेत्रीय रचनाकारों का अभूतपूर्व योगदान प्रत्यक्ष रुप से दृष्टिगत है। पुरुषों के समकक्ष ही महिला साहित्यकारों की एक बड़ी सूची साहित्य जगत में दर्ज है। जिन्होंने अनेकों भजन कीर्तन पद सवैया लेख उपन्यास आदि से साहित्य जगत को सुशोभित किया है। बुंदेलखंड की महिला साहित्यकारों ने घर के चार दिवारी से निकलकर अपनी विद्वत्ता का परिचय दिया है। 17वीं शताब्दी से लेकर राय प्रवीण , केशव पुत्र वधू, तीन तरंग , मीराबाई , डॉ माया सिंह और फिर मैत्रे पुष्पा तक महिला साहित्यकारों का सफर अनवरत जारी है।.
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