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जन-कल्‍याण के स्रोत वेद

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वेदों ने ही विश्व की संस्कृति, सभ्यता एवं मानवीय मूल्यों को पुष्टित और फलवित किया है। वेदों में वर्णित मन्त्र मानव जीवन, मानव सभ्यता व संस्कृति का दिग्दर्शन कराते हैं। लोककल्याण के उदात्त जीवन आदर्शों का बोध कराते हैं, जिनसे सीख लेकर मनुष्य अपना जीवन सरल, सुगम व शांतिपूर्ण व्यतीत कर सकता है। मानव के कल्याण में कुछ विरोधाकार होते हैं जो मानव को कल्याणकारी मार्गों से विचलित करते हैं। वे विरोधी तत्व जैसे– काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, और मत्सर्य जिनके कारण आज मानव जीवन बड़ा कठिन होता जा रहा है। ईर्ष्या, द्वेष के कारण मनुष्य को विविध कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इन कठिनाइयों का समाधान कर शांति, सद्भाव, बन्धुत्व स्थापित करने एवं जनकल्याण में वेदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रस्तुत शोध पत्र जनकल्याण के हेतु वेद को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
Maharaja Chhatrasal Bundelkhand University
Title: जन-कल्‍याण के स्रोत वेद
Description:
वेदों ने ही विश्व की संस्कृति, सभ्यता एवं मानवीय मूल्यों को पुष्टित और फलवित किया है। वेदों में वर्णित मन्त्र मानव जीवन, मानव सभ्यता व संस्कृति का दिग्दर्शन कराते हैं। लोककल्याण के उदात्त जीवन आदर्शों का बोध कराते हैं, जिनसे सीख लेकर मनुष्य अपना जीवन सरल, सुगम व शांतिपूर्ण व्यतीत कर सकता है। मानव के कल्याण में कुछ विरोधाकार होते हैं जो मानव को कल्याणकारी मार्गों से विचलित करते हैं। वे विरोधी तत्व जैसे– काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, और मत्सर्य जिनके कारण आज मानव जीवन बड़ा कठिन होता जा रहा है। ईर्ष्या, द्वेष के कारण मनुष्य को विविध कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इन कठिनाइयों का समाधान कर शांति, सद्भाव, बन्धुत्व स्थापित करने एवं जनकल्याण में वेदों की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रस्तुत शोध पत्र जनकल्याण के हेतु वेद को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।.

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