Javascript must be enabled to continue!
लोके वेदे च (कुमाऊनी शकुनाखर गीतों के सन्दर्भ में)
View through CrossRef
प्रस्तुत लेख में लोक और वेद के गहन संबंध को कुमाऊँनी शकुनाखर गीतों के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है। भारतीय संस्कृति में वेद ज्ञान के मूल स्त्रोत हैं और हमारे धार्मिक अनुष्ठान संस्कार तथा सामाजिक परम्परांए इन्हीं पर आधरित हैं। हिन्दू धर्म के षोडश संस्कारों में वैदिक मंत्रों का विशेष महत्व है।कुमाऊं क्षेत्र में इन संस्कारों के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत वैदिक मंत्रों के समानान्तर चलते हैं। जहां एक ओर आचार्य वैदिक मंत्रोचार करते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं उसी अनुष्ठान से संबंधित लोकगीत गाती हैं। इस प्रकार लोक और वेद का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।शकुनाखर, गणेश-पूजन, नामकरण, विवाह जैसे संस्कार गीत वैदिक भावभूमि से प्रेरित हैं। ये गीत लोकभाषा लोेकभावना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक हैं। इन्हें वैदिक मंत्रों का लोकानुकूल रूप भी कहा जा सकता है।अतः लोकगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होने वैदिक परम्पराओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके संरक्षण और संवर्धन से हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकती है।
Title: लोके वेदे च (कुमाऊनी शकुनाखर गीतों के सन्दर्भ में)
Description:
प्रस्तुत लेख में लोक और वेद के गहन संबंध को कुमाऊँनी शकुनाखर गीतों के संदर्भ में स्पष्ट किया गया है। भारतीय संस्कृति में वेद ज्ञान के मूल स्त्रोत हैं और हमारे धार्मिक अनुष्ठान संस्कार तथा सामाजिक परम्परांए इन्हीं पर आधरित हैं। हिन्दू धर्म के षोडश संस्कारों में वैदिक मंत्रों का विशेष महत्व है।कुमाऊं क्षेत्र में इन संस्कारों के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत वैदिक मंत्रों के समानान्तर चलते हैं। जहां एक ओर आचार्य वैदिक मंत्रोचार करते हैं, वहीं दूसरी ओर महिलाएं उसी अनुष्ठान से संबंधित लोकगीत गाती हैं। इस प्रकार लोक और वेद का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।शकुनाखर, गणेश-पूजन, नामकरण, विवाह जैसे संस्कार गीत वैदिक भावभूमि से प्रेरित हैं। ये गीत लोकभाषा लोेकभावना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवाहक हैं। इन्हें वैदिक मंत्रों का लोकानुकूल रूप भी कहा जा सकता है।अतः लोकगीत भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। उन्होने वैदिक परम्पराओं को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनके संरक्षण और संवर्धन से हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकती है।.
Related Results
वैदिक संस्कृति में वृक्ष-पूजा: एक अध्ययन
वैदिक संस्कृति में वृक्ष-पूजा: एक अध्ययन
वैदिक वाङ्मय में वृक्षों की उपादेयता को महिमामंडित किया गया है। ऋग्वेद में वृक्षों को वनस्पति (वनों के अधिपति) कहा गया है। वनस्पतियों को देवता केे रूप में ख्याति प्राप्ति करके एक म...
Vartmaan Samay Ki Uchch Shiksha Mein Mahilaon Ki Sahabhaagita Ki Vartmaan Pariprekshy Mein Sthiti
Vartmaan Samay Ki Uchch Shiksha Mein Mahilaon Ki Sahabhaagita Ki Vartmaan Pariprekshy Mein Sthiti
उच्च शिक्षा में महिलाओं की सहभागिता पर विचार करते समय यह स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ दशकों में महिलाओं के शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। पहले जहां समाज में महिलाओं ...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित आर्थिक समस्याएँ
हिन्दी की सुविख्यात लेखिका कृष्णा सोबती जी ने अपने उपन्यासों में अधिकतर समाज के मध्यवर्ग को चित्रित किया है। जिसके अन्तर्गत उच्च मध्यवर्ग व मध्यवर्ग दोनों का ही समावेश है। मध्यवर्ग...
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
कृष्णा सोबती के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याएँ
भारतीय साहित्य के परिदृश्य पर हिन्दी की सुविख्यात कथाकार कृष्णा सोबतीजी के उपन्यासों में चित्रित नैतिक समस्याओं पर प्रकाश डालने पर ज्ञात होता है। कृष्णाजी ने अपने उपन्यासों में उन ...
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
सोशल मीडियाः अभिव्यक्ति के नए चौनल
1947 में भारत को आजादी मिली थी। देश के प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के उपरान्त मिला था, किन्तु कुछ साल पहले तक अभिव्यक्ति के ...
भारतीय नौका निर्माण कला
भारतीय नौका निर्माण कला
वैदिक काल में लोगो को समुद्र का ज्ञान था। ऋग्वेद के अनेक मन्त्रों में समुद्र एवं नौकाओं के सन्दर्भ मिलते हैं। ऋग्वेद के अनेक मन्त्रों में साधारण नौकाओं और सीता से चलने वाली वही नौक...
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का STEM शिक्षा में एकीकरण: प्री-सेवा एवं सेवा-रत अध्यापकों के बीच जागरूकता, दृष्टिकोण एवं व्यवहार का सर्वेक्षण अध्ययन
भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) का STEM शिक्षा में एकीकरण: प्री-सेवा एवं सेवा-रत अध्यापकों के बीच जागरूकता, दृष्टिकोण एवं व्यवहार का सर्वेक्षण अध्ययन
भारत की शैक्षिक और वैज्ञानिक विरासत हजारों वर्षों पुरानी है, जिसमें गणित, खगोलशास्त्र, धातु विज्ञान, चिकित्सा, वास्तुकला, कृषि और पर्यावरणीय संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखन...
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
भारत में सूचना का अधिकार और सुशासन: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तीकरण का संस्थागत विश्लेषण
सूचना का अधिकार (RTI) आधुनिक लोकतांत्रिक शासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और नागरिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 प्रशासनिक कार्यप्रण...

