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अमरकांत के बाल-साहित्य का समाजशास्त्रीय अनुशीलन

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अमरकांत जी एक बाल साहित्यकार भी हैं। उनका वाल-साहित्य वच्चों की रूचि के अनुसार है। उन्होंने सरल भाषा में बाल साहित्य को निर्मित किया है अतः वच्चे उसे आसानी से समझ पाते हैं। उन्होंने अपने कुछ बाल साहित्य में रंगों और चित्रों का भी प्रयोग किया है जो बच्चों को अपनी और आकर्षित करता है। बालशौरी रेड्डी वाल साहित्य के विषय में कहते हैं- "मेरी दृष्टि में वाल साहित्य वह है जो बच्चों के पढ़ने योग्य हो, रोचक हो, उनकी जिज्ञासा की पूर्ति करनेवाला हो । बच्चों के साहित्य में अनावश्यक वर्णन न हो, उसमें बुनियादी तत्त्वों का चित्रण हो । कथावस्तु में अनावश्यक पेचीदगी न हो। वह सरल, सहज और समझ में आनेवाला हो, सामाजिक दृष्टि से स्वीकृत तथ्यों को प्रतिपादित करनेवाला हो। "१
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Title: अमरकांत के बाल-साहित्य का समाजशास्त्रीय अनुशीलन
Description:
अमरकांत जी एक बाल साहित्यकार भी हैं। उनका वाल-साहित्य वच्चों की रूचि के अनुसार है। उन्होंने सरल भाषा में बाल साहित्य को निर्मित किया है अतः वच्चे उसे आसानी से समझ पाते हैं। उन्होंने अपने कुछ बाल साहित्य में रंगों और चित्रों का भी प्रयोग किया है जो बच्चों को अपनी और आकर्षित करता है। बालशौरी रेड्डी वाल साहित्य के विषय में कहते हैं- "मेरी दृष्टि में वाल साहित्य वह है जो बच्चों के पढ़ने योग्य हो, रोचक हो, उनकी जिज्ञासा की पूर्ति करनेवाला हो । बच्चों के साहित्य में अनावश्यक वर्णन न हो, उसमें बुनियादी तत्त्वों का चित्रण हो । कथावस्तु में अनावश्यक पेचीदगी न हो। वह सरल, सहज और समझ में आनेवाला हो, सामाजिक दृष्टि से स्वीकृत तथ्यों को प्रतिपादित करनेवाला हो। "१.

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