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पंकज मित्र की कहानियों में भूमंडलीकरण का राजनितिक प्रभाव:
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१९९० के बाद हिंदी कथा - साहित्य में एक नई पीढ़ी का आगमन हुआ जो अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से अलग, नई संवेदनाओं और समस्याओ को लेकर हमारे समक्ष उपस्थित हुई l पंकज मित्र इसी नई पीढ़ी के कहानीकार हैं, इनका हिंदी कहानी में आगमन १९९० के बाद ही हुआ है l पंकज की कहानियों की अलग विषय वस्तु और भिन्न शैली है जिसकी वजह से वे दूसरों से बिल्कुल अलग और भिन्न प्रकार का स्वयं व्यक्त होती हैं l
पंकज मित्र कसबे के कहानीकार हैं l वे तमाम राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को कस्बे के सन्दर्भ में दिखाते हैं l पंकज छोटे कसबे के बड़े लोकनायक की भांति हैं, जो भूमंडलीकरण, पूँजीवाद और रिश्तों के बदलते समीकरणों को लेकर हमारे सामने उपस्थित होते हैं l इनकी कहानियों से गुजरते हुए यह कहना पड़ता है कि उन्होंने कथा - साहित्य के रूप और शिल्प को बदलकर ही रख दिया है l इनका जीवन अनुभव और दृष्टिकोण बहुत विस्तृत और व्यापक है l
Title: पंकज मित्र की कहानियों में भूमंडलीकरण का राजनितिक प्रभाव:
Description:
१९९० के बाद हिंदी कथा - साहित्य में एक नई पीढ़ी का आगमन हुआ जो अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से अलग, नई संवेदनाओं और समस्याओ को लेकर हमारे समक्ष उपस्थित हुई l पंकज मित्र इसी नई पीढ़ी के कहानीकार हैं, इनका हिंदी कहानी में आगमन १९९० के बाद ही हुआ है l पंकज की कहानियों की अलग विषय वस्तु और भिन्न शैली है जिसकी वजह से वे दूसरों से बिल्कुल अलग और भिन्न प्रकार का स्वयं व्यक्त होती हैं l
पंकज मित्र कसबे के कहानीकार हैं l वे तमाम राष्ट्रीय - अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं को कस्बे के सन्दर्भ में दिखाते हैं l पंकज छोटे कसबे के बड़े लोकनायक की भांति हैं, जो भूमंडलीकरण, पूँजीवाद और रिश्तों के बदलते समीकरणों को लेकर हमारे सामने उपस्थित होते हैं l इनकी कहानियों से गुजरते हुए यह कहना पड़ता है कि उन्होंने कथा - साहित्य के रूप और शिल्प को बदलकर ही रख दिया है l इनका जीवन अनुभव और दृष्टिकोण बहुत विस्तृत और व्यापक है l .
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